Friday, February 12, 2010

क्यूँ

 दरवाज़े की ओट से झाँक रहा कोई,
 क्यूँ  मुझसे अपना गम बाँट रहा कोई,
 आँखों के परदे जबकि गिरा दिए हैं मैंने,
 क्यूँ सपनो में आकर रुला रहा कोई,
 जब हैरान हूँ मैं खुद की परेशानियों से,
 क्यूँ मुझसे अपना गम बाँट रहा कोई.
 दरवाज़े की ओट से झाँक रहा कोई,
 जानता हूँ कोई अपना नहीं दूर दूर तक यहाँ,
फिर भी लगता प्यार से बुला रहा कोई,
खुद वैशाखियों के सहारे ज़िन्दगी बितायी है मैंने,
क्यूँ एक अपाहिज से सहारा मांग रहा कोई,
दरवाज़े की ओट से झाँक रहा कोई,
क्यूँ मुझसे अपना गम बाँट रहा कोई...........

Wednesday, February 10, 2010

संघर्ष

अंतहीन समंदर,आती जाती तेज़ लहरें,
एक आशंका लिए कि,
मझधार यह कहाँ ले जाएगी,
ज़िन्दगी से लड़ते- लड़ते मौत दे जाएगी,
एक किनारे की तलाश में,
निगाहें समेटना चाहती हैं समंदर,
मायूसी की घटा है चेहरे पर,
बयां करती एक दास्तान,
दरम्यान यह ज़िन्दगी मौत का
एक पल के झरोखे में मिटा जाएगी,
डूबना होगा अगर मुकद्दर मेरा,
लाख कोशिश न रंग लाएगी,
एक साहिल की तलाश में यह ज़िन्दगी बीत जाएगी...
क्या करूँ, मान लूं हार या करूँ संघर्ष आखिरी क्षण तक,
क्या होगा अंजाम यह तो तकदीर ही बताएगी........

Tuesday, February 9, 2010

Who is Thackeray ???

We know Raj Thackeray, Bal Thackeray and Uddhav Thackeray all are from single mafia family. I wonder why such types of mafias are allowed with their antisocial activities to destroy our national harmonic fabrics. They are not kings of Bombay. Bombay is not the property of only Marathi speaking communities. Bombay is the property of India.
This mafia family actually harms the Marathi peoples by becoming their so-called guardians in India. They are not tigers but coward gang sensitizing emotion of illiterate Marathi peoples and doing antisocial activities in Bombay which is the financial capital of India. We all Indian peoples should oppose such types of antisocial elements and the Government should control such types of evils of the society.

It is just impossible to believe that a person like Raj Thackeray with no political standing and following can carry out this ‘regional cleansing’ without any political patronage.

Why dont we guys understand that there are greater issues to address in our country than regionalism...Why cant we be just INDIANS…?
Please for GOD sake jst think about it.......

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