Wednesday, February 10, 2010

संघर्ष

अंतहीन समंदर,आती जाती तेज़ लहरें,
एक आशंका लिए कि,
मझधार यह कहाँ ले जाएगी,
ज़िन्दगी से लड़ते- लड़ते मौत दे जाएगी,
एक किनारे की तलाश में,
निगाहें समेटना चाहती हैं समंदर,
मायूसी की घटा है चेहरे पर,
बयां करती एक दास्तान,
दरम्यान यह ज़िन्दगी मौत का
एक पल के झरोखे में मिटा जाएगी,
डूबना होगा अगर मुकद्दर मेरा,
लाख कोशिश न रंग लाएगी,
एक साहिल की तलाश में यह ज़िन्दगी बीत जाएगी...
क्या करूँ, मान लूं हार या करूँ संघर्ष आखिरी क्षण तक,
क्या होगा अंजाम यह तो तकदीर ही बताएगी........

8 comments:

  1. this is a poem written by me in my schooldays...

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  2. hey....
    i remember...
    this was ur favourite one....
    nice to see you here...
    continue the work.....

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  3. not just good but fantastic one dude... bale to bahut hi umda ya wtvr it is called....

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  4. thanks nishant....
    hope u'll like my other poems too ...
    i'll be here wid them shortly...

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  5. hey i waz nt knowin u r a good poet too.............well u r doin a great job nd intrestin also...............so continue wid ur work.............

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  6. abe band hgadi bhi 24 hrs me do baar time batati hai.........tu to pura sahi hai....
    anyway.....great

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